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Wednesday, February 20, 2008

भारतीय पूंजी बाज़ार पर एक नज़रिया !

  • सेबी ने 1 फरबरी से FII को भारतीय पूंजी बाज़ार में Short Selling की अनुमति दे दी है, इसलिये अब आप ऐंसे ही अस्थिर बाज़ार की आदत डाल लें।
  • यदि आप लॉंग टर्म इंवेस्टर हैं, तो हो सकता है आने बाले 2-3 महिने आपको पूंजी बाज़ार में एकबार में निवेश पर चकित करने बाले प्रतिफल न मिलें, पर आप हर गिराबट पर थोडा थोडा निवेश करे, लॉंग टर्म में आपको अच्छा प्रतिफल मिलेगा।
  • फ्लोटिंग ब्याज दर लागू होने से अमेरिका में सबप्राइम समस्या 2008 के दूसरे हॉफ में और बढेगी। यदि सकल घरेलू आमदनी में महत्वपूर्ण बढोतरी नहीं हुई, तो अमेरिकन बाज़ार में और मन्दी आयेगी। यदि ऐसा होता है, तो भारतीय पूंजी बाज़ार भी क्रेश होगा (बीएई-14000, एनएसई-4000)
  • बेहतर होगा शॉर्ट टर्म इंवेस्टर बाज़ार से दूर रहें। 4 साल के बुल रन अनुभव के बाद भारतीय निवेशक को अपना नज़रिया बियर मार्केट के हिसाब से बदलने में दिक्कत आ रही है। जानकारी के अभाव में वे संकटग्रस्त अमेरिकन बाज़ार से अभी भी किसी चमत्कार की तमन्ना कर रहे हैं।
  • रिटेल इंवेस्टर डेरेवेटिव्स एवं पेनी स्टॉक्स से दूर रहें। मूलभूत स्टॉक्स में उचित मूल्य पर निवेश करें। समय समय पर प्रॉफिट बुकिंग अवश्य करते रहें।
  • आने बाला बजट भारतीय पूंजी बाज़ार को कोई बढत नहीं देगा। यूपीए सरकार इलेक्शन बजट पेश करेगी। बाज़ार में कोई प्री-बजट रैली नहीं दिख रही, बजट के बाद बाजार नीचे जा सकता है।
  • टाटा स्टील, हिंडाल्को और टाटा मोटर्स के निवेशक, निवेश का वास्तविक फयदा लेने के लिये 2-3 वर्ष के लिये निवेशित रहें।
  • टाटा केमिकल्स, मेट्रिक्स लेब्स, इंफोसिस एवं इंडियन होटल्स लॉंग टर्म इंवेस्टर्स के लिये जोखिम्पूर्ण निवेश हैं।
  • ज़ायलॉग सिस्टम्स एक अच्छा नया स्टॉक है।
  • एवेरॉन का मूल्यांकन कुछ ज्यादा लगता है।
  • गेटवे डिस्ट्रिपार्क्स कभी भी उछाल ले सकता है, इसकी सम्भार-तंत्र में अच्छी सम्भावनाएं हैं।

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