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Friday, February 22, 2008

बजट के आसपास बाज़ार का बरताव !

आज बजट से हमारी अपेक्षा इसलिये हैं, कि वित्तमंत्री जी ने पूर्व में भी अच्छे बजट पेश किये हैं। बजट के दिन बाजार की चाल यह सही दिशा नहीं दिखाती कि आगे वह किस करबट दौडेगा। वल्कि ऐंसा लगता है, जैंसे बजट डे को वित्तमंत्री अपने बैग मे उपहार रखे क्रिसमस के Santa का काम कर रहे हैं, ये अलग बात है, कि कई मौंकों पर निवेशक प्राप्त उपहारों से ज्यादा खुश नहीं होते। जब आप बजट से अपेक्षा लगा लेते हैं, तो फिर निराशा की सम्भावना भी उतनी ही ज्यादा हो जाती है। हमेशा ही बाज़ार के प्री-बज़ट और पोस्ट-बजट आचरण मे विपरीत सम्बन्ध देखा गया है। प्री-बजट काल में यदि बाज़ार का रुख सकारात्मक है, तो पोस्ट-बजट काल में निर्धारित रूप से नकारात्मक रहता है। इससे हमारी परिकल्पना को साफ आधार मिलता है, कि बजट से अपेक्षा करना सिर्फ उल्लास है। ये अपेक्षा बिरले ही साकार होती हैं एवं बजट के बाद बाज़ार से मिलने बाला लाभ भी निवेशक को हतोत्साहित ही करता है। हालांकि एक निवेशक जो बजट के पहले, 5 ट्रेडिंग हफ्ते खरीददारी कर बजट के बाद माल बेचता है, फायदे में ही रहता है। बजट पूर्व बाज़ार का नकारात्मक रुख आशंका पैदा करता है, कि बजट बाजार को चोट भी दे सकता है। हालांकि ये आशंका कभी गलत भी हो जाती है, एवं बजट के बाद बाज़ार में सकारात्मक परिणाम भी मिलते हैं।
इस परिकल्पना के आधार पर कहा जा सकता है, कि जब बाज़ार में आशंका बलबान होगी तो परिणाम होगा हडबडी में बिकबाली, जिसे संकटावस्था न समझ लोगों को इस मौके का फायदा खरीददारी कर उठाना चाहिये।
इस परिकल्पना का व्यापक निचोड यह निकलता है कि बाज़ार जो कर रहा है, वेहतर होगा हम ठीक उसके विपरीत करें। अगर बाजार में प्री-बजट तेजी है, तो यहां बेचें और बजट के बाद खरीददारी करें। और अगर बाजार में प्री-बजट बिकबाली की हडबडी है, तो यहां खरीददारी करें और बजट के बाद बेचें।

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