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Wednesday, February 27, 2008

बाज़ार में एक प्री-बजट रैली देखी जा रही है।

29 फरवरी 2008 को वित्तमंत्री माननीय पी. चिदम्बरम द्वारा संसद में पेश किया जाने वाला यू.पी.ए. सरकार का आम बजट एक ऐंसा विषय है, जो भारतीय पूंजी बाज़ार की आने बाले सप्ताह की काफी कुछ दिशा निर्धारित करेगा। बाज़ार एक प्री-बजट रैली देख सकता है। गुरुबार, 28 फरबरी, डेरीवेटिव सौदों की समाप्ती भी नजदीक है, जिनकी शॉर्ट कवरिंग से भी बाज़ार तेजी का रुख ले सकता है। बजट से हटकर, अमेरिकन फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में और कमी सम्भावित है, जो कि हमारे बाज़ार के लिये एक ट्रिगर होगी।
भारतीय पूंजी बाज़ार इस वर्ष यूपीए सरकार से एक लोकप्रिय बजट की उम्मीद कर रहा है, क्योंकि 2009 मे लोकसभा चुनाव होने हैं। इसलिये सम्भावना है कि, वित्तमंत्री ग्रामीण क्षेत्र, रोजगार, शिक्षा, कृषि एवं समाजिक स्वास्थ्य के क्षेत्र मे उन्नति के लिये बजट में ज्यादा प्रावधान कर सकते हैं।
अगर आम बज़ट का रुख सकारात्मक रहा तो बाज़ार तुरंत बढत की दिशा ले सकता है। सम्भाबना यह है, कि कार्पोरेट इंकम टेक़्स घट सकते हैं, या उस पर से 10% सरचार्ज हटाया जा सकता है। एक और सम्भाबना है, कि डिविडेंड डिस्ट्रिब्यूशन टेक्स 15% से घटा कर 12.5% किया जा सकता है। दूसरी तरफ वित्तमंत्री सिक्युरिटी ट्रांजेक्शन टेक्स बढा सकते हैं। यदि वित्तमंत्री निर्यात संबन्धी कारोबारों को कोई राहत पैकेज देते हैं, तो कुछ सेक्टर जैंसे- टेक्सटाइल्स, गारमेंट्स एवं इंफोर्मेशन टेक्नॉलोजी इत्यादि जो कि पिछले साल से डॉलर की मार झेल रहे है, कुछ तेजी का रुख कर सकते हैं।आने वाले सप्ताह में ऑटोमोबाइल स्टॉक्स चर्चा में रहना सम्भावित हैं, क्योंकि सरकार बजट में कार एवं मोटरसाईकिल पर उत्पाद शुल्क कम कर सकती है। उत्पाद शुल्क में कमीं से निर्माता कंपनियां अपने वाहनों की कीमत कम कर सकेंगी, जिससे उनकी विक्री बढेगी।
अमेरिकन अर्थव्यस्था मे अभी मन्दी की ही अधिक सम्भावना हैं, क्योंकि अब भी अमेरिकन सब प्राइम मॉर्ट्गेज संकट के खराब समाचारों का अंत नहीं हुआ है। ग्लोबल मार्केट सेंटीमेंट्स अभी भी कमजोर बने हुए हैं। फिर भी यहॉं एक प्री-बजट रैली दिख रही है।